केन्द्रीय सरकारी कर्मचारी कल्याण आवास संगठन
के.स.क.क.आ.सं.(आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय के अंतर्गत)
(भारत सरकार का एक स्वायत्त निकाय)
अंग्रेज़ी वेबसाइट (लाभार्थी प्रतिक्रिया)

परिचय

संगठन के बारे में :
पूरे भारत वर्ष के चयनित स्थानों पर घरों के विकास को बढ़ावा, नियंत्रण और समन्वय के लिए केंद्रीय सरकारी कर्मचारी कल्याण आवास संगठन (केंसककआसं) की स्थापना लाभ निरपेक्ष आधार पर कल्याणकारी उपाय के रूप में की गई थी। केंसककआसं  सोसायटी पंजीकरण 1860 अधिनियम के तहत पंजीकृत निकाय है। इसका संचालन जनपथ भवन, जनपथ, नई दिल्ली में स्थित मुख्यालय से किया जाता है। इसका कोई क्षेत्रीय कार्यालय नहीं है। यह संगठन निर्माण स्थलों में सीमित कर्मचारियों की एक टीम रखती है जो दिनों दिन होने वाले निर्माण एवं विकास के प्रचालनों की देख रेख करती है।.
संगठन का उद्देश्य है:

क  केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों, सेवारत और सेवानिवृत्त्‍ा दोनों,और अन्य बातों के साथ - साथ  मृतक केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों  के पति और पत्नी के‍ लिए लाभ निरपेक्ष आधार पर सामाजिक कल्याण योजनाओं के कार्य को पूरा करने हेतु  मकानों के निर्माण को बढ़ावा देने और सभी संभव मदद की आवश्यकता को पूरा करते हुए इस  उद्देश्य को हासिल करना
ख ऐसे सभी जैसे आकस्मिक या प्रेरक कार्य करना जिससे उपरोक्त में किसी भी या सभी उद्देश्यों को पूरा करने में सहायता मिलती हो।
संगठन का लक्ष्य केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों को आवास के लिए गुणवत्तापूर्ण कल्याण सेवा उपलब्ध कराना है। चैन्नई (फेज I), नेरूल एवं खरघर (नवी मुंबई),पंचकुला,कलकत्ता (फेज I), नोएडा (फेज I एवं II),गुड़गाँव (फेज I एवं II),चंडीगढ़,बंगलौर कोच्चि (फेज I),हैदराबाद (फेज I), पिमपरी-चिंचावड (पुणे) और नोएडा (फेज III), में संगठन की योजनाएँ पूरी हो चुकी हैं। इसमें कुल 8386 मकान की इकाईयाँ हैं। अहमदाबाद,जयपुर,हैदराबाद (फेज II),पंचकुला (फेज II) में आवास योजनाएँ चल रही हैं और नोएडा (फेज IV एवं V) के अंतर्गत 3745 मकान की इकाईयाँ निर्माणाधीन है।

सांविधानिक ढाँचा :

केंद्रीय सरकारी कर्मचारी कल्याण आवास संगठन का पंजीकरण सोसायटी पंजीकरण 1860 अधिनियम के तहत सोसायटी के रूप में हुआ है। इसका गठन शहरी विकास एवं गरीबी उन्मूलन मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वाधान में हुआ है। संगठन में नियंत्रण के चार स्तर हैं :
                        1.            सामान्य निकाय
                        2.            शासी परिषद
                        3.            कार्यपालक समिति
                        4.            मुख्य कार्यपालक अधिकारी

सामान्य निकाय सांविधानिक प्राधिकार है जो सोसायटी के सामान्य नीति दिशानिर्देशों को प्रस्तुत करने और नियमों एवं विनियमों को बनाने या संशोधन करने का कार्य करती है। शाषी परिषद का कार्य सोसायटी के कार्यों का प्रबंध और उनको चलाना, कर्मचारियों की जरूरत को मंजूरी देना और निवेश के लिए नीतियाँ तैयार करना है। कार्यपालक समिति, संगठन के दिनों दिन कार्यों को देखती है। कुछ शक्तियाँ मुख्य कार्यपालक अधिकारी (मुकाअ) को प्रत्यायोजित की गईं है जो संगठन की ओर से कार्य करते हैं और सभी संविदाओं को निष्पादित करते हैं।



संगठन का दर्शन:

सीजीईडब्ल्यूएचओ के मुख्यालय में संगठन निम्नलिखित दर्शन पर कार्य करता है:

  • सभी प्रकार के कार्य सिविल निर्माण, इलैक्ट्रिकल,मैकेनिकल,विकास या योजना आदि को बाहरी पार्टियों को ठेके पर देना।
  • व्यावसायिक सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए वास्तुकार फर्मों को नियुक्त करना।
  • केवल सीमेंट और स्टील तक सीमित परियोजनाओं के लिए सामग्री की केंद्रीय आपूर्ति करना।
  • कार्य की निगरानी के लिए प्रत्येक परियोजना हेतु क्षेत्रीय समिति/परियोजना दलों का गठन करना। ये दल केसककआसं के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के प्रति जिम्मेदार होते हैं।
  • अन्य व्यावसायिकों जैसे कानूनी सलाहकार, इमारती सलाहकार, मिट्टी सलाहकार आदि को अंशकालिक या अंतराल आधार पर जरूरत के हिसाब से नियुक्त किया जाता है।
  • संगठन के लेखों की लेखापरीक्षा के लिए प्रतिष्ठित लेखापरीक्षकों की फर्मों को नियुक्त किया जाता है।

संगठनात्मक संरचना:
           केसककआसं की गतिविधियों की पहुँच बहुआयामी है, किंतु संगठन एक छत के नीचे अपना कार्य करता है। इसलिए, यह विवकेपूर्ण होगा कि प्रत्येक व्यावसायिक विभाग अपने अपने क्षेत्र का कार्य देखें और आसानी से एकदूसरे से बात कर सकें। व्यावसायिक समूह संगठन को और अधिक सुसम्बद्ध, प्रभावी और जिम्मेदार बनाते हैं। संगठन में तीन निदेशक होते हैं जैसे तकनीकी, प्रशासन एवं विपणन और वित्त इन सभी को आईटी सेल द्वारा सहयोग किया जाता है। संगठन चार्ट के लिए कृपया क्लिक करें।

प्रचालन:
संगठन की गतिविधियों में निम्नलिखित शामिल है:

भूमि का अधिग्रहण
उस विशेष स्थान पर और कितनी मात्रा में भूमि को प्राप्त किया जाना है उसका आधार केंद्रीय सरकार के कर्मचारी की बहुलता या उस स्थान की माँग पैटर्न को देखकर किया जाता है। वस्तुगत आकलन के लिए, विशेष माँग सर्वेक्षण कराए जाते हैं। इस प्रकार के माँग सर्वेक्षणों से परियोजना में विभिन्न प्रकार के बनाए जाने वाले आवास इकाइयों (डीयूज)के निर्माण के  अनुपात के निर्धारण में भी सहायता मिलती है। सभी शुरूआती परियोजनाओं में निम्नलिखित आवास इकाइयों की सघनता प्रतिशत को अपनाया जाता हैः वर्ग



आवास का प्रकार

आवास

अुनमानित सुपर क्षेत्र (वर्ग फीट)

आवास इकाइयों का प्रतिशत घनत्व

1 बेडरूम इकाई

550

15%

2  बेडरूम इकाई

850

60%

3 बेडरूम इकाई

1100

20%

3 बेडरूम एवं अध्ययन इकाई

1350

5%



भूमि के स्पष्ट आबंटन प्राप्त करने के बाद ही परियोजनाओं की योजना  को शुरू और उसके बाद आवास योजनाओं की घोषणा की जाती है। मामले दर मामले के आधार पर जैसा उचित लगता है उस हिसाब से राज्य भूमि आवंटन एजेंसियों या निजी एजेंसियों से भूमि की खरीद की जाती है।

परियोजनाओं की योजना
निम्नलिखित दो विधियों में एक को अपनाते हुए परियोजनाओं की योजना और निष्पादन किया जाता है:

()पारंपरिक विधि:परियोजना के लिए एक बार जगह की पहचान हो जाने के बाद, संगठन द्वारा स्थानीय भूमि आवंटन प्राधिकरण से भूमि की खरीद की जाती है। एक बार भूमि का आवंटन होने के बाद संगठन द्वारा परियोजना के निष्पादन के लिए कार्यपालक समिति के साथ-साथ ठेकेदार (रों) द्वारा मंजूर की गई कसौटी और प्रक्रिया के आधार पर परियोजना की तकनीकी निगरानी के लिए वास्तुकार सलाहकार की नियुक्त करती है।     
उपरोक्त गतिविधियों को करने के लिए और निष्पादन के दौरान तकनीकी निगरानी के लिए पहले से कार्यपालक समिति द्वारा मंजूर की गई कसौटी और प्रक्रिया के आधार पर परियोजना की तकनीकी निगरानी के लिए प्रतिष्ठित वास्तुकार सलाहकारों की एजेंसी को भी नियुक्त किया जाता है।

()वर्तकुंजी अनुबंध विधि: स्थान पर स्पष्ट माँग होने के बावजूद स्थानीय भूमि आवंटन प्राधिकरण द्वारा भूमि का आवंटन उपलब्ध न कराए जाने पर, संभावित लाभार्थियों की आकांक्षाओं को पूरा करने की यह उपलब्ध विधि है। इस विधि में भूमि की खरीद की दिशा में आरंभिक निवेश को कम करने और कार्यों के निष्पादन के नियोजन और संविदा को अंतिम रूप देने के लिए अमल अवधि का समय भी मिल जाता है। इस विधि में संगठन के निवेश से पहले एजेंसी को अंतिम रूप दिया जा सकता है और भूमि की खरीद के लिए निधियों की आवश्यकता केवल तभी होती है जब वर्तकुंजी ठेकेदार का पंजीकरण संगठन के नाम से हो। बीच की अवधि में,योजना की घोषणा की जा सकती है और संभावित लाभार्थियों से भूमि की लागत देने को कहा जा सकता है, जिससे भूमि की खरीद के निवेश पर पड़ने वाले ब्याज की लागत को कम किया जा सके।

वर्तकुंजी संविदा से संगठन को एक ही एजेंसी के साथ काम करना होता है और जिसके प्रभाव से संविदा के निष्पादन के साथ-साथ भुगतान जारी करने में आने वाली प्रशासनिक बाधाएँ भी कम हो जाती हैं।    
आगे वर्तुर्नबंधीय संविदा से लागत कम आती है क्योंकि इससे भूमि के विकास का खर्च राज्य भूमि आवंटन एजेंसियों द्वारा किए जाने वाले खर्च से बहुत कम होता है|    

आवास योजना
विभिन्न आवास इकाइयों के लिए आवास परियोजना के नियोजन और उसकी विधिवत कीमत तय करने के बाद उसे ‘आवासीय योजना’ के रुप में पात्र केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के समक्ष इसे रखा जाता जाता है| उपलब्ध कराया जाता है|
()घोषणा:  बनाई गई आवासीय योजना की घोषणा समाचारपत्रों के माध्यम से करने के बाद पात्र और रुचि रखने वाले केंद्रीय सरकार कर्मचारियों से आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं| आवासीय योजना को भरपूर प्रचार देने के लिए, अन्य संसूचना की विधियों जैसे केसककआसं के समाचारपत्र, भारत तथा विदेशों में स्थित केंद्र सरकार के विभिन्न कार्यालयों आदि को संबोधित पत्रों का उपयोग किया जाता है

()पंजीकरण और आवंटन: आवेदनों  :  पूर्व परिभाषित प्रपत्र में आवेदनों को मॅंगाया जाता है (जिसे मॉंग पर नाममात्र की लागत पर ब्रोशर के साथ उपलब्ध कराया जाता है| इस ब्रोशर में सेवा शर्तों का ब्यौरा होता है जिन्हें ‘केसककआसं के नियम’ के नाम से जाना जाता है| प्रस्तावित आवास इकाइयों की संख्या से अधिक आवेदन प्राप्त होने के मामले में पात्र आवेदकों के बीच से कंप्यूटरीकृत ड्रा निकाला जाता है| एक संक्षिप्त प्रतीक्षा सूची बनाई जाती है, आवास की बुकिंग छोड़ने/रददीकरण के आधार पर आगे और आवंटन किया जाता है| सफल आवेदकों को आवंटन पत्र जारी किए जाते है, जिसमें आवंटन की सेवा शर्तें और अनंतिम भुगतान सारणी का विवरण होता है| इस भुगतान सारणी तथा परियोजना की जमीनी प्रगित के आधार पर किस्तें ली जाती हैं|

परियोजनाओं का निष्पादन

() निर्माण एजेंसी : यदि परियाजना पारंपरिकतौर पर तैयार होती है तो इस स्थिति में परियोजना के निष्पादन के लिए कार्यपालक समिति द्वारा अनुमोदित विस्तृत एवं वृहद प्रक्रिया के अनुसार निर्माण एजेंसी का चयन किया जाता है| हालांकि, टर्नकी संविदा विधि के मामले में, निर्माण एजेंसी पहले से होती है और वह तुरंत निर्माण कार्य आरंभ कर देती है

() परियोजनाओं का प्रबंधन और नियंत्रण:नियोजन सारणी का पालन, गुणवत्ता को बरकरार रखते हुए निर्माण की लागत को सुनिश्चित रखने के लिए, केसककआसं परियोजनाओं की निगरानी,प्रबंधन और नियंत्रण को चार भागीय व्यवस्थाओं के अंतर्गत किया जाता है

जो निम्न प्रकार से है :
·        परियोजना प्रबंधन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एक वास्तुकार परामर्शदाता को नियुक्त किया जाता है|
·        परियोजना दल का मुखिया परियोजना प्रबंधक होता है जिसे केसककआसं द्वारा विर्निदिष्ट रुप से उस विशेष परियोजना के लिए नियुक्त किया जाता है|
·       शीर्ष कार्यालय के तकनीकी निदेशालय के अधिकारियों द्वारा प्रगति का तकनीकी निरीक्षण और निगरानी की जाती है जिसमें मुकाअ का नियमित दौरा और निरीक्षण भी शामिल होता है|
·        नियमित परियोजना को गुणवत्तायुक्त परामर्श देने के लिए प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान जैसे आईआईटीज आदि को नियुक्त करना|


समाप्ति

लाभार्थियों से अंतिम भुगतान मिलने के बाद, जिसमें बढ़ी हुई दर और ब्याज का भाग यदि कोई हो, अपार्टमेंट मालिकाना एसोसिएशन शुल्क आदि, लाभार्थियों को आवासीय इकाइयों का कब्जा सौंपना शामिल होता है| अंतिम कालअप पत्र  जारी होने के तिथि के पॉच महीनों के भीतर पूरी तरह से तैयार केसककआसं की परियोजना को सौंपने की अपेक्षा होती है| इस सारणी के अनुपालन के प्रयास किए जाएं जिसमें संवैधानिक आवश्यकताओं जैसे संबंधित बिक्री?/ पटटा विलेख आदि का पंजीकरण का अनुपालन शामिल है| इस गतिविधि की समाप्ति पर, केसककआसं की परियोजना/ योजना को समाप्त मान लिया जाता है|

अनुरक्षण
निर्माण गतिविधियों की समाप्ति और आवासीय परिसर कार्यभार सौंपने तथा उसके विभिन्न प्रकार के कार्यों को चलाने के लिए लाभार्थियों के बीच से अपार्टमेंट मालिकों की एसोसिएशन का गठन किया जाता है| इस एसोसिएशन को आरंभिक निधि देने के लिए, आवासीय इकाई की लागत का 1.5 प्रतिशत है जो आवासीय इकाई की कुल लागत में से होता है, को ‘अपार्टमेंट मालिक एसोसिएशन’ शुल्क के नाम से आरक्षित रखा जाता है और उसे एसोसिएशन को दे दिया जाता है|